मंगलवार, 7 मार्च 2017

कहीं किसी की आह तो नहीं ले ली

कहीं किसी की आह तो नहीं ले ली
कहीं किसी का दिल दुखाया तो नहीं

चंद सिक्कों की खातिर झूठे बन गए
मैंने कभी गैर तुम्हें बनाया तो नहीं
  
हिदायत जो दी थी दादी ने एक दिन
बुजुर्गों को कहीं फिर सताया तो नहीं

सदमे में बैठा मेरा रकीब इक कोने में
खुशी का राज उसको बताया तो नहीं 

तुम खुदा नहीं खुदा जैसे भी नहीं
वो जो खुदा है उसे भुलाया तो नहीं

-विशाल शुक्ल अक्खड़

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