सोमवार, 2 जनवरी 2017

बहुत याद आती है गांव तेरी

बहुत याद आती है मेरे गांव तेरी
जब कोई पड़ोसी हाल नहीं पूछता
जब कोई बुजुर्ग सवाल नहीं पूछता
बहुत याद आती है मेरे गांव तेरी


जब कोई आंधी सिर से नहीं गुजरती
जब कोई रात बतकही में नहीं बीतती
जब गुड्डू कहानी की जिद नहीं करता
जब बुढ़ऊ रात भर खो-खो नहीं करता

रविवार, 1 जनवरी 2017

हद तो हो गयी हमने कलेजा निकाल रख दिया
उनका हुजूम आया और वाह वाह कर चल दिया
 या तो वक़्त बदलता है या वे लोग 
जिन्हें अपनों पर ऐतबार नहीं होता
 कुछ ऐसे होते हैं जहाँ में जिन्हें 
खुद के सिवा किसी से प्यार नहीं होता
काश की ऐसी साली होती
जैसे आधी घरवाली होती
पेट से भरी पूरी सी एकदम
दिमाग से वह खाली होती

सपा की दंगल-3

किसने किससे करी बेवफाई
पूत कपूत की चचेरा वो भाई
मुलायम के दिल से पूछो जरा
किसने नहीं वफा है निभाई

सपा की दंगल-2

दल की यह कैसी दलदल
बदल रहे सब ही पलपल
जनता करे बस एक सवाल
इनका दल या उनका दल

सपा की दंगल-1

जय-जय राम गोपाल
जय-जय शिव के पाल
एक-दूजे से करी लड़ाई
एक-दूजे को राह दिखाई
बन गए मुखिया देखो 
मुलायम के लाल
जय-जय राम गोपाल
जय-जय शिव के पाल


अमर के हुए बोल मुलायम
आजम किसी ओर न धायम
नरेश बन गए प्रदेश नरेश
संग हैं इनके अग्रवाल (नरेश अग्रवाल)
जय-जय राम गोपाल
जय-जय शिव के पाल