गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

फर्ज निभाया, कर्ज बाकी

कहकर गए थे जल्दी लौट आने को
तिरंगे में लिपटे चले आए घर को
जरा भी न सोचा क्या हमारा होगा
सिसकने को छोड़ गए हमें पल-पल को

सैकड़ों सुहाग बचाए गोदें न होने दीं सूनी
कलाइयां दे गए अनगिनत राखियों को
मां भारती के लाल तुम कर्ज चुका गए
अगली बारी फिर भूल न जाना हमको

नन्ही मुनिया सहमा छोटू याद करेंगे
वक्त ने जो हम पर ढाया सितम को
बिटिया की विदाई बेटे के सेहरे का कर्ज
है अभी बाकी कि लौटना होगा तुमको


(उत्तराखण्ड में आई आपदा के दौरान चौबेपुर-कानपुर के रहने वाले जवान नित्यानंद लोगों को बचाते हुए हेलीकॉप्टर क्रैश होने से शहीद हो गए थे। उसी दौरान ये पंक्तियां अनायास कही थीं और हिन्दुस्तान कानपुर ने प्रकाशित भी की थीं। आज अचानक वह पेज मिला तो फिर से...)

कोई टिप्पणी नहीं: