शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

बुक डिपो संजोए है वंशीधर शैदा की यादें

वंशीधर शैदा
जन्म: 20 जुलाई 1904
निधन:15 नवंबर 1988
जन्म स्थान: ग्राम कक्योली तहसील कायमगंज, जनपद फर्रुखाबाद 



फर्रुखाबाद की माटी में जन्मे वंशीधर शैदा की यादें उनके द्वारा स्थापित किया गया बुक डिपो संजोए हुए है। पड़ोसियों ने भले ही शैदा को नहीं देखा मगर वे उनकी शख्शियत के बारे में काफी कुछ जानते हैं। उनका घर अब काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। यहीं पर उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं। हालांकि उनके नाम को और जीवंत रखने के लिए शासन स्तर से कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए। 7 जुलाई 1927 को वंशीधर शैदा ने लोहाई रोड पर शैदा बुक डिपो की स्थापना की थी और यहीं पर रामायण प्रेस भी चलाते थे। उनकी क ई पुस्तकें ब्रिटिश सरकार ने जब्त कर उनके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। वर्ष 1932 में शैदा के मित्र कृष्णगोपाल चतुर्वेदी ने वाल्मीकि रामायण को तुलसीकृत रामायण की तरह दोहा चौपाइयों में रचने की इच्छा प्रकट की। उसके तुरंत बाद से ही शैदा ने रामायण की रचना प्रारंभ कर दी। शैदा की रचित पुस्तकें देश में ही नहीं बल्कि फिजी, कनाडा, बहरीन, ओमान, आस्ट्रेलिया आदि देशों में पढ़ी जाती थीं। शैदा के बड़े पुत्र ओमप्रकाश सक्सेना कहते हैं, पिताजी का देश प्रेम उनकी रचनाओं में झलकता है। आठ वर्ष की आयु मे ही जब गुरुदेव माधौदास के पास एक महात्मा बाबा मनीरामदास जी गीता पढ़ने आया करते थे तब सुनकर ही वे श्लोकों को कंठस्थ कर लेते थे। लोहाई रोड पर आज भी शैदाजी की यादों को संजोते हुए रामायण प्रेस और बुक डिपो है। मुख्य बाजार में बुक डिपो की अपनी पहचान है। यहां पर ज्यादातर धार्मिक साहित्य मिलता है। साथ ही शैदाजी की संकलित कृतियां भी यहां पर मिलती हैं। अपने गांव नवाबगंज के कक्योली से शैदाजी वर्ष 1927 में फ र्रुखाबाद आए थे। शैदाजी के नाम पर बुक डिपो से उनकी यादें जरूर जुड़ी हैं। मगर उनके नाम पर किसी तरह के पुस्तकालय अथवा अन्य किसी स्थान का नाम नहीं किया गया है।

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