बुधवार, 2 नवंबर 2016

बिहार में मिड-डे मील खाकर हमेशा को सो गए नौनिहालों को समर्पित
तेरे हाथों में सौंपे थे ललन अपने
कैसे कर डाला तुमने सितम इतने
बाद मुद्दत के आती चमक इनमें
देखो सूख गए फूल चमन के कितने
अरमां मिट गए, मिट गए सभी सपने
वे तो भूल गए थे सब धरम जितने
अंगना के बिरवा उजड़ गए क्यों
सबके सब रहनुमा ये किया जिनने
जब भी रोया हूं समझाया मेरे मन ने
चुप होता नहीं क्या लगा तू गुनने
लौट आएगा न तेरी आंखों का नूर
ये करम थे तेरे जो किये तुमने
अब चुभते नहीं दर्द जो दिये रब ने
दिल माने नहीं जो कहा सबने
आंसू सूखे नहीं क्या करूं अब जतन
कैसे कह दूं कि सब हो तुम्हीं फितने
एक दिन आयेगा वह भी करम गिनने
बचकर जायेगा तब तू कहां छिपने
इंसा होगा तो इंसाफ इसी जग में
जब भी पूछा तो बोला यही दिल ने
(रचना खो सी गई थी, आज मिली तो..)

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