बुधवार, 2 नवंबर 2016

हां मेरे भी दो चेहरे हैं
दुनिया से हंस हंस कर
बातें करना
बिना वजह खुद को
हाजिरजवाब दिखाना
पर असली चेहरे से
केवल तुम वाकिफ हो
है न...
क्योंकि तुम्हारे ही
आंचल में तो ढलके हैं
दुनिया के दिए आंसू
तुम्हारे ही कदमों में
झुका है गलती से
लबरेज यह चेहरा
तुम पर ही तो
उतरा है जमाने
भर का गुस्सा
और यह दुनिया
कहती है
मैं तुम्हारे ही सबसे करीब हूं
मेरा सबसे अच्छा चेहरा
तुम्हारे लिए है...
विशाल शुक्ल अक्खड़

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