बुधवार, 2 नवंबर 2016

हर ओर सन्नाटा पसरा है हर ओर उदासी छायी है
भोर पहर जैसे चेहरों पर रैना घिर-घिर आयी है
पल भर की यह माया है पल भर का ही यह मेला है
आनी-जानी दुनिया में रुत कौन सी ऐसी आयी है

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