बुधवार, 2 नवंबर 2016

वह महज सात साल की है
मां से कहती है
करती क्या हो मेरे लिए
बस इतना ही तो
सुबह स्कूल जाने के लिए
जगा दिया
टिफिन में मेरे पसंद का
खाना रख दिया
जाते-जाते दे दीं
दो-चार नसीहतें
थाली परोस दी
लौटने पर मुंह धुलते
फिर चिंता करने लगीं
मेरे होमवर्क की
लग गईं शाम से
मेरे साथ ही
और भूल गईं अपनी पसंद
का खाना पकाना
फोन पर कह दिया पापा से
तुम खाकर ही घर आना
परीक्षा मेरी थी पर
रात भर तुम सोईं नहीं
जब तक घर न लौटी
प्रार्थना में ही खोई रहीं
तो..तो इसमें क्या
कौन सी मां है जो
यह सब नहीं करती
तु्म ही कैसे हो
उनमें अनूठी
सब सुनकर भी
मां चुप रही
मंद-मंद मुस्काती
आंसू पीती रही
फिर बोली, हां यह सच है
मैं बिल्कुल नहीं हूं अनूठी
अपने बच्चे के लिए इतना ही कर देना
जब तुम मां बनना मेरी बेटी...
(विशाल शुक्ल अक्खड़ 27-10-15)

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