सोमवार, 23 मई 2016

याद बहुत फिर आईं अम्मां

बहुत दिनों बाद फिर आईं अम्मां
मकां को घर बनाईं अम्मां
रात पहर जब बीत गई
याद बहुत फिर आईं अम्मां

शनिवार, 7 मई 2016

मां तुझे सलाम

मां ने बड़े जतन से गांव से भेजा है
डिब्बे में घी का कुछ कतरा अब भी है
जानता हूं वह मेरी मां है, सब जानती है
याद मेरे दूध न पीने का नखरा अब भी है
साथ भेज दी हैं भुनी हुई मूंगफलियां भी
मेरी सेहत पर लगता उसे खतरा अब भी है