बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

तुम चोर नहीं सपनों के हत्यारे हो

तुम चोर नहीं सपनों के हत्यारे हो
रात रात भर फिरते मारे मारे हो
तुम चोर नहीं सपनों के हत्यारे हो

मेहंदी पुछ गई मुनिया की
जब रात में डेरा डाला
डिग्री छिन गई पप्पू की
जब तुमने घर को खंगाला
काश कि तुमको खबर भी होती
क्या क्या तुम कर डाले हो
चोर नहीं तुम सपनों के हत्यारे हो