बुधवार, 23 सितंबर 2015

जज्बातों की कहानी

चलो आज तुम्हें सुनाते हैं
जज्बातों की एक कहानी
इसमें न कोई राजा है
और न ही है कोई रानी
मन का बंधन
दिल की धड़कन
सांसों की महक
अहसासों की खनक
इतनी सी है
इसकी रवानी
चलो आज तुम्हें सुनाते हैं
जज्बातों की एक कहानी
इसमें न कोई राजा है
और न ही है कोई रानी
गंगा सी निर्मलता
मासूम एक निश्छलता
गोधूलि की बयार
हारे दिल की पुकार
राधा जैसी वो
केशव की दीवानी
चलो आज तुम्हें सुनाते हैं
जज्बातों की एक कहानी
इसमें न कोई राजा है
और न ही है कोई रानी

सोमवार, 22 जून 2015

तुम्हें हक नहीं हमें यूं बदनाम कर जाओ
हाल-ए-दिल सुनो यूं फिर आम कर जाओ
राजदार हमारी हर सांस थी तुम में बसी
रूठ कर यूं ही न हमें गुमनाम कर जाओ
कोई रूठा हो तो मनाना नहीं आता
फर्क पड़ता है कि नहीं बताना नहीं आता
बाद मुद्दत के वो आए भी तो क्या
प्यार कितना है जताना नहीं आता
मेरे दर्द का हर लम्हा जवाब मांगेगा
मेरे आंसू का हर कतरा जवाब मांगेगा
जी लूंगा ऐ जिंदगी तुझे मैं यूं ही
मेरी मौत पर जो बिखरा जवाब मांगेगा
कोई चैन से सोया है मेरी नींद उड़ा के
वो क्यूं हमसे रूठा है मेरी नींद उड़ा के
जाकर कह दो यूं हीं न छाएं हैं बादल
कोई रात भर रोया है मेरी नींद उड़ा के

सोमवार, 30 मार्च 2015

नहीं करता हूं ऐसा काम कि मैं आम हो जाऊं
झूठ को सच कह नहीं पाता भले बदनाम हो जाऊं
कोशिश कर जीभर मेरे रकीब मुझे डुबाने की
तेरे सदके ही सही अक्खड़ से गुलफाम हो जाऊं
किसी को भूल से भी भूल में न रहना चाहिए
वक्त का हर शख्स गुलाम याद रखना चाहिए
आज मेरी बारी है कल तेरी होगी मेरे दोस्त
हुस्न तेरा हो न हो जहां में इश्क रहना चाहिए
कभी सोचा है तुम्हें सबसे शिकायत क्यों रहती
दूसरों की मिटाने से अपनी लकीर लंबी नहीं होती
हरे भरे को ठूंठ लिखूं
कैसे इतना झूठ लिखूं
सागर बन फिरता रहा नदियों ने राहें मोड़ लीं
बादल बन बरसा दिल जब सखियों ने बाहें छोड़ दीं
मिलन की बेला में भी न आया मुझको करार
आंसू बन निकले अरमां अपनों ने उम्मीदें तोड़ दीं
नहीं करता हूं ऐसा काम कि मैं आम हो जाऊं
झूठ को सच कह नहीं पाता भले बदनाम हो जाऊं
कोशिश कर जीभर मेरे रकीब मुझे डुबाने की
तेरे सदके ही सही अक्खड़ से गुलफाम हो जाऊं
ताऱीफ कैसे करूं तेरी उस अदा की
लाखों का दिल तोड़ करोड़ों की ओर बढ़ी

एक शेर

उफ ये अदा तेरी गैरों से दिल लगाने की
यूं ही कह देते दुआ क्यूं की मेरे मर जाने की

एक शेर

जबसे हमने बिजलियां गिराना छोड़ दिया
लोग समझते हैं हमारे जिगर में आग नहीं

एक शेर

खेल कर मेरे अरमानों से 
वह अनजान बने फिरते हैं
इतने भी नावाकिफ नहीं हम 
दिल में तूफान लिए फिरते हैं

एक शेर

वाह तो नहीं मांगी थी टूटे दिल के साज पर
यह सदा बुलंद होगी उनके इस अंदाज पर

बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

तुम चोर नहीं सपनों के हत्यारे हो

तुम चोर नहीं सपनों के हत्यारे हो
रात रात भर फिरते मारे मारे हो
तुम चोर नहीं सपनों के हत्यारे हो

मेहंदी पुछ गई मुनिया की
जब रात में डेरा डाला
डिग्री छिन गई पप्पू की
जब तुमने घर को खंगाला
काश कि तुमको खबर भी होती
क्या क्या तुम कर डाले हो
चोर नहीं तुम सपनों के हत्यारे हो