मंगलवार, 25 मार्च 2014

यह जन्नत है

यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी
शिकारा पर बरसे हिमालय का.. पानी
यहां का हर मंजर ......बड़ा खूबसूरत
हवा भी यहां की ........बड़ी ही रुहानी
यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी

चिनाब के दर पे लिखीं जो कथाएं
बच्चों को अपने आओ ....सुनाएं
कई सपूतों ने सींचा है .....इसको
मोहब्बत में इसके दी कई कुर्बानी
यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी

बर्फों में इसके जो बारूद डाला
किसकी तलब है खूं का निवाला
न रंगीन बनाओ ये परियों की धरती
सफेदी की है ये जनम से दीवानी
यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी

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