शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

पत्नी रानी

पत्नी रानी पत्नी रानी
दिनभर करती हैं मनमानी
मेरी पत्नी रानी तेरी पत्नी रानी
हम सबकी पत्नी रानी

सुबह जगे से शाम ढले तक
शाम से लेकर सूर्य उगे तक
किचकिच करतीं दिलवरजानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

समय से सोना समय से जगना
समय से खाना समय से पीना
सबपर चलातीं हुकुम रानी
पत्नी रानी पत्नी रानी....

भूख लगे चाहे प्यास लगे
मन में जब अहसास जगे
नहीं सतातीं घर की महरानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

सिर की पीड़ा दिल का दर्द
बदन में अकड़न जकड़े सर्द
बन बरसें राहत का पानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

प्रेमी की सूरत थी देखी
ममता की मूरत बन बैठी
दिल की धड़कन नस का पानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

बिस्तर पर सिलवट न फूटे
कपड़ों की खूंटी जब टूटे
कभी न करती आनाकानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

भइया की अपने बड़की बहना
बनकर आई मेरे घर की गहना
नए-नए रिश्तों संग बन गई नई कहानी
पत्नी रानी पत्नी रानी....

अम्मां-बप्पा की बीमारी
भाई-बहनों की हरकारी
सभी निभातीं बड़ी सयानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

सासू मइया हुकुम डोलावयं
पिता सरीखे ससुर बुलावयं
छमछम दौड़े ले दाना-पानी
पत्नी रानी पत्नी रानी....

ननदों के है नाज उठाती
जेठ के मन को खूब सुहाती
जल-भुन जाती है जेठानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

देवर आगे-पीछे घूमे
मन की सब बातें कह झूमे
तुम ही चुनना अपनी देवरानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

पास-पड़ोस हो रिश्तेदारी
सबकी करती खातिरदारी
हर मन की याद सुहानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

बेटा-बिटिया की सरदारी
सेहत हो या पढ़ने की बारी
सबकी करतीं निगहबानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

पत्नी रानी

पत्नी रानी पत्नी रानी
दिनभर करती हैं मनमानी
मेरी पत्नी रानी तेरी पत्नी रानी
हम सबकी पत्नी रानी

सुबह जगे से शाम ढले तक
शाम से लेकर सूर्य उगे तक
किचकिच करतीं दिलवरजानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

समय से सोना समय से जगना
समय से खाना समय से पीना
सबपर चलातीं हुकुम रानी
पत्नी रानी पत्नी रानी....

भूख लगे चाहे प्यास लगे
मन में जब अहसास जगे
नहीं सतातीं घर की महरानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

सिर की पीड़ा दिल का दर्द
बदन में अकड़न जकड़े सर्द
बन बरसें राहत का पानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

प्रेमी की सूरत थी देखी
ममता की मूरत बन बैठी
दिल की धड़कन नस का पानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

बिस्तर पर सिलवट न फूटे
कपड़ों की खूंटी जब टूटे
कभी न करती आनाकानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

भइया की अपने बड़की बहना
बनकर आई मेरे घर की गहना
नए-नए रिश्तों संग बन गई नई कहानी
पत्नी रानी पत्नी रानी....

अम्मां-बप्पा की बीमारी
भाई-बहनों की हरकारी
सभी निभातीं बड़ी सयानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

सासू मइया हुकुम डोलावयं
पिता सरीखे ससुर बुलावयं
छमछम दौड़े ले दाना-पानी
पत्नी रानी पत्नी रानी....

ननदों के है नाज उठाती
जेठ के मन को खूब सुहाती
जल-भुन जाती है जेठानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

देवर आगे-पीछे घूमे
मन की सब बातें कह झूमे
तुम ही चुनना अपनी देवरानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

पास-पड़ोस हो रिश्तेदारी
सबकी करती खातिरदारी
हर मन की याद सुहानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

बेटा-बिटिया की सरदारी
सेहत हो या पढ़ने की बारी
सबकी करतीं निगहबानी
पत्नी रानी पत्नी रानी...

सियासत को कितना गिराओगे

सियासत को कितना और गिराओगे
कब तलक यूं सब्जबाग दिखाओगे
समझती है सब जानती है ये जनता
रहनुमाओं चुप करो मुंह की खाओगे

दिलों के दर्द पढ़ता हूं...

बज्म-ए-उर्दू में खड़ा मैं नज्म पढ़ता हूं
कुर्बानी हुसैन की, ईशू के जख्म पढ़ता हूं
राम का वनवास, गुरु नानक के उपदेश
हिन्दी-उर्दू के नहीं, दिलों के मैं दर्द पढ़ता हूं

आईना

आईना हूं झूठ कुछ कह नहीं सकता
सच कहूं ये रहनुमा सह नहीं सकता
अधर में रहूं या तो चटक जाऊं यूं ही
वह जो चाहता वैसा रह नहीं सकता

मायका

अपने घर का मोह कहां कब किससे छूटा है
बिटिया गई परदेस रिश्ता कब इससे छूटा है
जगते-सोते, हंसते-रोते, गर्मी-सर्दी-वर्षा में
यह दिल अब भी हरदम मायके को रोता है...

माटी की बिटिया

चाक चले हाथ सधे
माटी की बिटिया गढ़े

कुम्हार जनक साजें मोहे
धागा नाल जुदा करे

आवं तपे रंग चढ़े
सजनी तब ससुराल चले

तेल-बाती साथ दें
रोशन फिर घर-द्वार करे

यह जन्नत है

यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी
शिकारा पर बरसे हिमालय का.. पानी
यहां का हर मंजर ......बड़ा खूबसूरत
हवा भी यहां की ........बड़ी ही रुहानी
यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी

चिनाब के दर पे लिखीं जो कथाएं
बच्चों को अपने आओ ....सुनाएं
कई सपूतों ने सींचा है .....इसको
मोहब्बत में इसके दी कई कुर्बानी
यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी

बर्फों में इसके जो बारूद डाला
किसकी तलब है खूं का निवाला
न रंगीन बनाओ ये परियों की धरती
सफेदी की है ये जनम से दीवानी
यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी


नखरे फिजाओं में घुलते हैं इसके
सजरों पे पंछी चहकते हैं ...इसके
झीलों की रानी हम कहते हैं जिसको
डल की वह रुत है बड़ी ही ....सुहानी
यह जन्नत है इसकी सुनो तुम कहानी

महंगाई

उफ यह महंगाई, हाय ये महंगाई
एक ही दिन में खा गई सारी कमाई

ठोंक बजा कर हर सामान चुनतीं
पत्नी जी तोड़-तोड़ कर अरमान बुनतीं
सूची से कम जरूरी सामान खारिज करतीं
फिर याद आ गई अचानक ही दवाई
उफ यह महंगाई, हाय ये महंगाई...

बर्तन की दुकान हो कपड़े की दुकान
बड़ी हसरत से हर सामान देखतीं
उठातीं जग फिर कप खरीद लेतीं
बिटिया की साइकिल पर न आई
उफ यह महंगाई....

चुन-चुन कर हर एक दीया रखतीं
घूम-घूम कर जिया को तकतीं
कहीं भारी न पड़ जाए बजट गुनतीं
घट गई गणेश-लक्ष्मी की लंबाई
उफ यह महंगाई....

हीरा तकतीं चांदी उठातीं
मोलभाव कर लौटा देतीं
याद आ जाता आलू-टमाटर
सोच-समझकर गृहस्थी सजाई
उफ ये महंगाई.....

(जिया बिटिया का नाम है...)

एक मुक्तक

वो करते गए जफाएं मैं निभाता चला गया
उनके दिए हर जख्म सहलाता चला गया
तकदीर में तो न था ऐसा सितम ऐ खुदा
तू भी तो हर गम मुझे पिलाता चला गया