शनिवार, 27 अप्रैल 2013

वह दोस्त नहीं हो तुम

गर्दिश में जिसे याद करूं वह दोस्त नहीं हो तुम
तुम न जानो इरादे इतने मदहोश नहीं हो तुम

फिर क्यों चले आते हो दोस्ती का दामन थामे
अपना दर्द कैसे दिखाऊं होश में नहीं हो तुम 

हुस्न का गुरूर है तुमको तो अपने पास रहने दो
जी न सकूं जिसके बिन वो महबूब नहीं हो तुम

दिल है यह मेरा किसी कबाड़ी की दुकान नहीं
खरीद लूं फिर भी इतने पशेमां नहीं हो तुम

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