शनिवार, 27 अप्रैल 2013

साली

आज तुम्हारी आयी है कभी हमारी भी आती थी
आज तुम्हारी भायी है कभी हमारी भी भाती थी

कोई कहता भोली है कोई शर्मीली बताती थी
जब भी वह आती थी खुशबू सी भर जाती थी

जीजा-जीजा कहती आगे-पीछे डोला करती थी
साली अकेली हूं आपकी हर पल याद दिलाती थी

अच्छा है पत्नी से इस पर रार हमेशा होती थी
उसको लेकर हममें तो तकरार हमेशा होती थी

वह भी खुश तुम भी खुश अब क्यों शर्माती हो
यह करो वह मत करो तुम्हीं तो टोका करती थी

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