रविवार, 20 जनवरी 2013

मैंने उस नजर से नजर मिलाई क्यूं,

मैंने उस नजर से नजर मिलाई क्यूं, 
सब कसमें वफा की निभाई क्यूं। 

कौन कहता है बेवफा ही बेवफा होता है,
मैं तो हर वफा करके भी हरजाई हूं।

हर अक्स में वह ही वह, हर अक्स उसका है
यह कोई ख्वाब नहीं, ख्वाब का तसव्वुर नहीं
मैं ही उसका ख्वाब-ए आशनाई-हूं... 

बुधवार, 2 जनवरी 2013

बाबुल तूने ऐसा किया क्यों भेद रे

बाबुल तूने ऐसा किया क्यों भेद रे
बाबुल तूने ऐसा किया क्यों भेद रे....

हमको भेजा पिया के घर को
देकर अपना संदेश रे
जहां भी जाना नाम कमाना
रखना सुखी अपना देश रे

बाबुल तूने ऐसा किया क्यों भेद रे...

भइया के लिए तूने घर सजाया
प्यारी दुलहिनियां घर लेके आया
उन्हीं दोनों से तूने घर बनाया
हमको भेज दिया परदेस रे
बाबुल तूने ऐसा किया क्यों भेद रे...