रविवार, 13 अप्रैल 2008

सपना

सपना देखा करता था

जब छोटा था, सच्चा था

सपना देखा करता था

जब पढ़ता था, बच्चा था

सपने होते थे अजीबोगरीब

देश के विकास के

भ्रष्टाचार के विनाश के

नेताओं के सुधार के

और सपने होते थे

गांवों के विकास के

आजादी के, इतिहास के

सपने होते थे

गांधी के अरमानों के

भगत जैसे कुरबानों के

सपने होते थे

रानी झांसी मर्दाना के

और सपने होते थे

प्यार के, मुहब्बत के

भाईचारे के और और...और...और

सपने होते थे......

सारे सपने, सपने ही रह गये

भला खुली आंखों से देखा

सपना भी कभी पूरा हुआ

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