मंगलवार, 7 मार्च 2017

कहीं किसी की आह तो नहीं ले ली

कहीं किसी की आह तो नहीं ले ली
कहीं किसी का दिल दुखाया तो नहीं

चंद सिक्कों की खातिर झूठे बन गए
मैंने कभी गैर तुम्हें बनाया तो नहीं
  
हिदायत जो दी थी दादी ने एक दिन
बुजुर्गों को कहीं फिर सताया तो नहीं

सदमे में बैठा मेरा रकीब इक कोने में
खुशी का राज उसको बताया तो नहीं 

तुम खुदा नहीं खुदा जैसे भी नहीं
वो जो खुदा है उसे भुलाया तो नहीं

-विशाल शुक्ल अक्खड़

गुरुवार, 2 मार्च 2017

चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई

चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई
रास्ता कय गदहे भी ओढ़िहैं रजाई
चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई

कुत्तन का मिलिहै दूध-औ बिस्कुट
घोड़न का कच्चा चना-औ तिलकुट
खच्चर कय सब होय जाई सगाई
चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई

चूहा का बिल्ली से निजात दिलाइब
बिल्ली का जमकय चूहा खिलाइब 
मछलिन के ताईं सगरा खुद जाई
चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई

नाली कय किरवा सब दारू नहाइहैं
गंगा कय प्राणी सब आंख चोरैइहैं
बुलबुल के बानी मा प्रचार समाई
चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई

घोड़ी पर चढ़िहैं चोर-औ उचक्के
गाड़ी पर नचिहैं लगायकय सुट्टे
तोता-औ-मैना कय पिंजरा रंगाई
चुनावन के दिन मा बड़ा मजा आई
-विशाल शुक्ल अक्खड़

बिटिया भई विदा घर सूना हो गया

बिटिया भई विदा घर सूना हो गया
हंसते चेहरों का दर्द दूना हो गया
पिंजरे में फंस गई उड़ती मुनिया  
जिस दिन उसका गौना हो गया
-विशाल शुक्ल अक्खड़

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

गर्दभ जी का राज चलेगा

मेरी बीवी वंडरफुल
मुझको पीटे थंडरफुल
मुझको तो वह रोज पीटती
जैसे दवा की डोज पीटती
सुबह पीटती शाम पीटती
रात ढले वह रात रीटती
ससुरा मेरा थानेदार
लेकर उसका नाम पीटती
साला भी तो साला है
लेकर उसका अरमान पीटती
सासू मां का ज्ञान पीटती
साली का गुणगान पीटती
पिटते पिटते गधा हो गया
इलेक्शन में मैं खड़ा हो गया
जीतूंगा तो मैं ही अबकी
नैया डूबेगी तब सबकी
विधानसभा में बैठूंगा मैं
कुर्सी पर फिर ऐंठूंगा मैं
शोर-शराबा बंद होगा
ढेंचू-ढेंचू गूंजेगा
धोबी सारे जेल में होंगे
भाई-बिरादर मौज में होंगे
आदमी को जो कहा गधा
उसको दी जाएगी सजा
मन का मेरे साज बजेगा
गर्दभ जी का राज चलेगा 

शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

गधा ही रहूंगा

गधा था गधा हूं गधा ही रहूंगा
सधा था सधा हूं सधा ही रहूंगा
न तोड़ूंगा विश्वास उनका कभी
बना था बना हूं बना ही रहूंगा 

लादकर बोझ कंधे पर चलता रहूंगा
सांझ हो दोपहर मैं तो रमता रहूंगा
तुम बनो तो बनो मंत्री या विधायक
मैं तो जनता था जनता हूं जनता रहूंगा 
-विशाल शुक्ल अक्खड़

मेरी नैया थी डूबी मंझधार में

मेरी नैया थी डूबी मंझधार में
तुम बने थे खेवैया मेरे प्यार में
सच से होते ही सामना ऐ सनम
चल दिए तुम झूठ के संसार में  
 -विशाल शुक्ल अक्खड़

सोमवार, 2 जनवरी 2017

बहुत याद आती है गांव तेरी

बहुत याद आती है मेरे गांव तेरी
जब कोई पड़ोसी हाल नहीं पूछता
जब कोई बुजुर्ग सवाल नहीं पूछता
बहुत याद आती है मेरे गांव तेरी


जब कोई आंधी सिर से नहीं गुजरती
जब कोई रात बतकही में नहीं बीतती
जब गुड्डू कहानी की जिद नहीं करता
जब बुढ़ऊ रात भर खो-खो नहीं करता

रविवार, 1 जनवरी 2017

हद तो हो गयी हमने कलेजा निकाल रख दिया
उनका हुजूम आया और वाह वाह कर चल दिया
 या तो वक़्त बदलता है या वे लोग 
जिन्हें अपनों पर ऐतबार नहीं होता
 कुछ ऐसे होते हैं जहाँ में जिन्हें 
खुद के सिवा किसी से प्यार नहीं होता
काश की ऐसी साली होती
जैसे आधी घरवाली होती
पेट से भरी पूरी सी एकदम
दिमाग से वह खाली होती